मैहर।  आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से भूमि खरीद-फरोख्त की गतिविधियों में अचानक आई तेजी ने स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पहले सामान्य रूप से रजिस्ट्रियां होती थीं, वहां अब बड़ी संख्या में बाहरी निवेशकों की सक्रियता दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर कृषि भूमि पिछले दो सालो से सौदे तेजी से हो रहे हैं। इससे भविष्य में भूमि उपयोग पर्यावरण और स्थानीय आबादी के हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनता जा रहा है।
भूमि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में अचानक भूमि कारोबार बढ़ने के पीछे औद्योगिक विकास, निवेश की संभावनाएं या अन्य कारण हो सकते हैं। हालांकि यदि बड़े स्तर पर भूमि हस्तांतरण हो रहा है, तो संबंधित विभागों को पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए।
सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि किन क्षेत्रों में कितनी भूमि की खरीद-फरोख्त हुई, क्या सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार हुईं और क्या स्थानीय लोगों के हितों का पर्याप्त ध्यान रखा गया है।
जानकारों का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास के साथ पारदर्शिता भी उतनी ही आवश्यक है। यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हैं, तो संबंधित जानकारी सार्वजनिक होने से अफवाहों पर भी विराम लगेगा और लोगों का विश्वास मजबूत होगा।

न्यूज़ सोर्स : आमजन की आवाज