8800 करोड़ कृषि ऋण लक्ष्य पर सरकार फोकस, मंत्री केदार कश्यप ने दिए निर्देश
खरीफ सीजन 2026: किसानों को खाद-बीज की कमी न हो, मंत्री केदार कश्यप ने दिए पुख्ता इंतजाम के निर्देश
रायपुर: छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर प्रदेश सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में किसानों को खाद, बीज और कृषि ऋण की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि समितियों (पैक्स) में किसानों की मांग के अनुरूप समय पर सामग्री पहुंचनी चाहिए ताकि बुआई के समय कोई बाधा न आए।
ऋण और खाद वितरण का लक्ष्य
बैठक में बताया गया कि इस साल किसानों की आर्थिक मदद के लिए राज्य सरकार ने 8,800 करोड़ रुपये के कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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अब तक का वितरण: अब तक किसानों को 741 करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है।
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खाद का स्टॉक: राज्य में कुल 10 लाख मीट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य है, जिसके मुकाबले अब तक 5.42 लाख मीट्रिक टन (54 प्रतिशत) भंडारण पूरा हो चुका है।
वर्तमान में समितियों में उपलब्ध उर्वरक:
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यूरिया: 2.56 लाख टन
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डीएपी: 67 हजार टन
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एनपीके: 1.01 लाख टन
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पोटाश: 39 हजार टन
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एसएसपी: 78 हजार टन
डीएपी की कमी से निपटने की तैयारी
वैश्विक स्तर पर डीएपी (DAP) की संभावित किल्लत को देखते हुए मंत्री कश्यप ने अधिकारियों को दूरदर्शी रणनीति अपनाने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि बाजार में उपलब्ध वैकल्पिक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए और किसानों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित किया जाए।
बीज आपूर्ति पर जोर
सीजन के लिए राज्य में कुल 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग है, जिसके विरुद्ध अब तक 81,640 क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण समितियों में किया जा चुका है। मंत्री ने बीज निगम को सख्त हिदायत दी है कि बाकी बचे हुए स्टॉक की आपूर्ति जल्द से जल्द पूरी की जाए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, मार्कफेड एमडी जितेंद्र शुक्ला, बीज निगम एमडी अजय अग्रवाल, अपेक्स बैंक एमडी के.एन. कांडे सहित कृषि और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ मौजूद रहे।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस मानसून सत्र में प्रदेश का कोई भी किसान संसाधनों की कमी के कारण पीछे न छूटे।
