केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति रहता है परेशान
यदि जन्म कुंडली में चन्द्रमा किसी भी भाव में अकेला बैठा हो, उससे आगे और पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम दोष बनता है। केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान होता है। उसे हमेशा एक अज्ञात भय रहता है। उसके जीवन काल में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। आर्थिक रूप से ऐसे व्यक्ति कमजोर ही रहते हैं। जीवन में अनेकों बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति खुद को बहुत समझदार समझते हैं। उन्हें लगता है की उनसे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति कोई नहीं है। ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़े और शक्की स्वभाव के होते हैं। संतान से कष्ट पाते हैं परन्तु दीर्घायु होते हैं। कुछ परिस्थितियों में केमद्रुम योग भंग या निष्क्रिय भी हो जाता है।
जन्म कुंडली में केमद्रुम दोष हो परन्तु चन्द्रमा के ऊपर सभी ग्रहों की दृष्टि हो तो केमद्रुम दोष के दुष्प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं।-यदि चन्द्रमा शुभस्थान (केंद्र या त्रिकोण) में हो तथा बुद्ध, गुरु एवं शुक्र किसी अन्य भाव में एक साथ हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।-यदि दसवें भाव में उच्च राशि का चन्द्रमा केमद्रुम दोष बना कर बैठा हो परन्तु उस पर गुरु की दृष्टि हो तो भी केमद्रुम दोष भंग माना जायेगा।यदि केंद्र में कहीं भी चन्द्रमा केमद्रुम दोष का निर्माण कर रहा हो परन्तु उस पर सप्तम भाव से बली गुरु की दृष्टि पड़ रही हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।

‘मैं बोलने से नहीं डरती’—रीत पड्डा का ट्रोल्स को करारा जवाब
रूमर्ड गर्लफ्रेंड के साथ सार्वजनिक जगह पर नजर आए आमिर अली
अमित शाह आज पेश करेंगे TMC के खिलाफ भाजपा का ‘अभियोगनामा’, 15 साल के आरोपों का खुलासा
कांग्रेस ने नेपाल के नवनिर्वाचित पीएम बालेंद्र शाह को दी बधाई, कर्नाटक नीति पर भी हलचल
गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: लूथरा भाइयों को कोर्ट से बड़ा झटका, अग्रिम जमानत खारिज